काश कि आप यह समझ सकते, कि इस कम्बखत काश से रोजाना कितना लड़ते हैं हम, किसी ना किसी दिन तो पा ही लेंगे ए मंज़िल तुम्हे, ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खाकर मर जाएंगे हम..!!

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